बिहार राज्य में सोनार/सुनार समाज पारंपरिक रूप से स्वर्ण एवं रजत आभूषण निर्माण और व्यापार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आर्थिक एवं सामाजिक वर्ग रहा है। वर्तमान समय में बदलते सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में यह समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन समस्याओं के समाधान हेतु संगठित चिंतन एवं रणनीतिक पहल आवश्यक है।
मुख्य समस्याएँ एवं समाधान
1. जाति आधारित गणना में त्रुटि
समस्या:
बिहार के जाति आधारित गणना (2022–23) में “सोनार” के स्थान पर “स्वर्णकार” लिखे जाने से वास्तविक जनसंख्या का गलत आंकलन हुआ । इस जाति आधारित गणना में बड़ी संख्या में लोगों ने “सोनार” के स्थान पर “स्वर्णकार” लिख दिया । इस विसंगति के कारण सोनार समाज की वास्तविक जनसंख्या लगभग 4% होने के बावजूद आधिकारिक आंकड़ों में यह 1% से भी कम प्रदर्शित हुई । परिणामस्वरूप, राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं नीतिगत भागीदारी बाधित हो रही है । आज सही जनगणना पहचान अभियान “सोनार” नाम से एकरूपता सुनिश्चित करना, भविष्य की गणनाओं हेतु जागरूकता अभियान चलना आवश्यक है ।
समाधान:
“सोनार” नाम की एकरूपता सुनिश्चित की जाए
भविष्य की गणनाओं के लिए जागरूकता अभियान
समाज स्तर पर डेटा संकलन और सत्यापन अभियान
2. मतदान शक्ति का बिखराव
समस्या:
सोनार समाज का मतदान भावनात्मक या बिखरे हुए आधार पर होता है, जिससे राजनीतिक प्रभाव कमजोर पड़ता है। सोनार समाज का मतदान राजनेताओं द्वारा दिखाए गए जज्बाती एवम साम्प्रदायिक मुद्दों पर आधारित होता है। सोनार समाज आपने मत का प्रयोग समाज के प्रबुद्ध जनों द्वारा दिखाई गई किसी एक एवम सामूहिक रणनीति आधारित एवम एक सटीक दिशा में केंद्रित नहीं होता, इससे सोनार समाज की लोकतांत्रिक शक्ति बिखर जाती है और सत्ता में उचित भागीदारी नहीं मिल पाती। सोनार समाज को प्रबुद्ध वर्ग के नेतृत्व में अपने मत का ध्रुवीकरण करना चाहिए। लोकतंत्र में संख्या ही शक्ति है, और मताधिकार उसका सबसे बड़ा हथियार ।
समाधान:
प्रबुद्ध वर्ग के नेतृत्व में सामूहिक रणनीति
चुनाव के प्रति जागरूकता अभियान
“एक दिशा, एक निर्णय” का सिद्धांत अपनाना
3. राजनीतिक भागीदारी
समस्या:
एक ख़ास राजनितिक दल के समर्थक होने के बावजूद सोनार समाज को आज तक वाजिब राजनैतिक भागीदारी नहीं मिली। सोनार समाज लंबे समय से इनका समर्थक वोट बैंक रहा है। परंतु आज तक बिहार में सोनार समाज को इनके द्वारा उचित राजनीतिक भागीदारी मुहैया नहीं करवाई गई। निकट भविष्य में बिहार में सोनार समाज को वाजिब राजनैतिक भागीदारी मिलनी चाहिए, अगर ऐसा नहीं होता है तो भविष्य में सोनार समाज द्वारा एक सोनार चेतना कार्यकर्म आयोजित करना चाहिए ।
समाधान:
सभी राजनीतिक दल से संवाद स्थापित करना
कभी से प्रतिनिधित्व की स्पष्ट मांग
विभिन्न राजनीतिक दलों से संतुलित संबंध
4. स्वर्ण व्यापार में सुरक्षा
समस्या:
निकट भूतकाल में बिहार में सोनार समाज के स्वर्ण व्यवसाय कर रहे लोगों के साथ लूट एवं अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है । अमूमन लूट की घटना के बाद सोनार नेतृत्व भुक्तभोगी को साथ ले डीएसपी, एसपी, डीजीपी से मिलते एक ज्ञापन देते हैं तथा पुलिस पर दबाव बनाने की नीति पर लग जाते हैं । यह नीति सही है परंतु सिर्फ इस नीति का पालन “सांप निकल जाने पर लाठी पीटने” वाली नीति है। लूट के बाद डीजीपी के पास ज्ञापन देने वाले सोनार नेतागण कृपया निम्नलिखित "सावधानी ही बचाव है" वाली नीति पर भी ध्यान दें। सोनार समाज के स्वर्ण व्यापारीयों, आज सरकारी निकाय से छुप छुपा कर स्वर्ण व्यपार करना अत्यंत मुश्किल एवम जोखिम का कार्य हो गया है । लूट एवं अपराध से अपने स्टाक को सुरक्षित रखने के लिए आपको अपने कुल स्वर्ण व्यापार को आयकर तथा वाणिज्यकर में घोषित कर अपने कुल स्वर्ण एवं रजत स्टॉक का बीमा करा लेना चाहिए । तत्पश्चात लूट की घटनाएं होंगी तो यह तो सकून रहेगा की बीमा कंपनी मुआवज़ा देगी ।
समाधान:
व्यापार का पूर्ण वैधानिक पंजीकरण
स्टॉक का बीमा अनिवार्य करना
CCTV, सुरक्षा गार्ड और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा
प्रशासन से स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग
5. असंगठित ज्वेलर्स पर संकट
समस्या:
BIS लाइसेंसिंग और हॉलमार्किंग प्रक्रिया जटिल है । नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित जागरूकता अभियान चलाए बिना Bureau of Indian Standards (बीआईएस) बिहार के 38 जिलों के असंगठित ज्वेलर्स वर्ग से बीआईएस की जटिल लाइसेंसिंग एवम हॉलमार्किंग प्रक्रिया के शत प्रतिशत अनुपालन की अपेक्षा कर रही है । नतीजा बिहार के छोटे एवम असंगठित ज्वेलर्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है तथा उनके स्वर्ण स्टाक पर बिआइएस द्वारा सर्च एवं सीजर का ख़तरा मंडरा रहा है ।
समाधान
बिआइएस द्वारा जागरूकता शिविर
सरल लाइसेंसिंग प्रक्रिया की मांग
समूह आधारित (cluster) पंजीकरण मॉडल
6. असंगठित ज्वेलर्स एवं कॉरपोरेट प्रतिस्पर्धाा
समस्या:
बड़े ब्रांड्स से पारंपरिक स्वर्ण व्यवसाय प्रभावित । बिहार के अधिकांश जिलों में स्वर्ण उद्योग के बड़े ब्रांड्स और कॉरपोरेट कंपनियों का तेजी से विस्तार हुआ है। इसका असंगठित पारंपरिक ज्वेलर्स के व्यवसाय पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है । कुछ सर्वे रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दशक में बिहार के आधिकांश असंगठित ज्वेलर्स स्वर्ण व्यापार से बाहर हो जायेंगे । आखिरी वक़्त है सोनार भाइयों, आपस के मतभेद भुला कर सामाजिक एकता आपसी सहयोग, नेटवर्किंग और एक दुसरे के व्यवसाई को बढ़ावा देने की सोचें ।
समाधान:
लोकल ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग
“लोकल ज्वेलर्स नेटवर्क” बनाना
आपसी सहयोग और रेफरल सिस्टम
7. कारीगर वर्ग पर संकट
समस्या
आभूषण निर्माण में अन्य वर्गों की बढ़ती भागीदारी, एवं मशीन द्वारा स्वर्ण आभूषण बनाने से बिहार के पारंपरिक आभूषण कारीगरों पर खतरा मंडरा रहा है । भारत के महानगर स्थित ज्वेलरी हब से इतने कम वेस्टेज पर आभूषण बन कर बिहार के होल सेलर के पास आ रहे हैं की बिहार के सोनार जाति के पारंपरिक कारीगर वर्ग के अस्तित्व पर गंभीर संकट आन पडा है । आज आवश्यकता है बिहार पटना के पारंपरिक सुनार कारीगर वर्ग को संस्थागत, वित्तीय एवं तकनीकी सहायता की ।
समाधान:
बिहार के कारीगरों के लिए प्रशिक्षण संस्थान
बिहार के कारीगरों को सरकारी वित्तीय सहायता
बिहार के कारीगरों को कौशल विकास योजनाओं से जोड़ना
8. संगठनात्मक अनुशासन की कमी
समस्या
आज बिहार का हर सोनार नेतृत्व करना चाहता है, अनुयायी कम हैं लीडर ज्यादा । सोनार समाज में 100 में से 99 लीडर बनना चाहते हैं । इससे बिहार सोनार समाज की संगठनात्मक एकता और सामूहिक शक्ति कमजोर हो रही है । जिस समाज में हर व्यक्ति सिर्फ बोलना चाहता हो, सुनने और साथ चलने की संस्कृति नगण्य हो गई हो, जहां हर व्यक्ति सिर्फ नेतृत्व करना चाहता हो, जिम्मेदारी से साथ देने वाले की संख्या नगण्य हो गई हो, क्या उस समाज का विकास संभव है । आज बिहार सोनार समाज को आवश्यकता है अनुशासनपूर्वक अनुसरण की भावना का विकास करने की ।
समाधान:
संगठन में भूमिका स्पष्ट करना
अनुशासन और टीमवर्क पर जोर
“लीडर और फॉलोअर” संस्कृति विकास ा
9. युवा नेतृत्व का अभावी
समस्या
बिहार पटना के वरिष्ठ सोनार नेतृत्व द्वारा युवाओं को नेतृत्व के अवसर से वंचित करना । “एको अहम द्वितीयो ना अस्ति” की दूषित मानसिकता, "आगे बढ़ो, पर मुझसे आगे नहीं बढ़ो", की घटिया मानसिकता । राजधानी के उम्र दराज सोनार नेता युवा एवं अगली पीढ़ी को सोनार समाज में खुद से आगे बढ़ता देख उनकी राह में रोड़े अटकाते हैं, उनकी टांग खींचते हैं । अन्य सोनार संगठन को छोड़ दीजिये खुद मगध ज्वेलर्स एसोसिएशन ने अपने उदय के समय इस समस्या को बखूबी झेला है । आवश्यकता है इस परिपाटी को त्याग देने की यह परिपाटी बिहार सोनार समाज के विकास में बाधक है ।
समाधान:
युवा नेतृत्व कार्यक्रम
संघ में 40% पद युवाओं के लिए
मेंटरशिप मॉडल लागू करना
10. सोनार संघ में लोकतंत्र की कमी
समस्या
बिहार पटना के कुछ सोनार संघ दशकों से पारिवारिक नियंत्रण में हैं । संघ के अध्यक्ष पद पर एक ही व्यक्ति दो दो दशकों से काबिज है । यही नही, संघ के अध्यक्ष पद पर उनका यह अवैध कब्जा बना रहे इसलिए उन्होंने अपने संघ के मेमोरेंडम आफ एसोसिएशन (MOA) में लिख मारा है कि मेरे प्रतिष्ठान के बाएं चौराहे से ले कर मेरे प्रतिष्ठान के दाएं चौराहे तक के सुनार ही मेरे सोनार संघ के अध्यक्ष बनने की पात्रता रखते हैं । ऐसा इसलिए क्योंकि उस उनके प्रतिष्ठान के दाहिने बाएं उस सड़क पर उनके रिश्तेदारों का बाहुल्य है, चुनाव जीतना आसान है । यह सरासर राजतंत्र है परन्तु लोकतंत्र का झूठा चोला ओढने के लिए एवं सोनार समाज की आँख में धुल झोंकने के लिए वह लोग अपने संघ में चुनाव अवश्य कराते हैं । यही नहीं संघ के MOA के अनुसार मात्र 350 मीटर लम्बी की एक सड़क के सोनार संघ हो कर खुद को सम्पूर्ण बिहार का "एपेक्स ज्वेलर्स एसोसिएशन" होने का फर्जी दावा भी करते हैं । विभिन्न सोनार संघ द्वारा इस तरह के कार्य पर विराम लगना चाहिए।
समाधान:
सोनार संघ में पारदर्शी चुनाव प्रणाली
राजतंत्र से चलने वाले सोनार संघ के MOA में लोकतांत्रिक संशोधन
अध्यक्ष के कार्यकाल की अधिकतम सीमा निर्धारित करना
11. सोनार संघ में लोकतंत्र की कमी
समस्या
बिहारी सोनार समाज संत नरहरि दास महाराज सोनार को पूजते हैं, उनकी जयंती पारंपरिक रूप से माघ कृष्ण पक्ष तृतीया, हिंदू कैलेंडर के माघ महीने में ढलते चंद्रमा के तीसरा दिन को मनाई जाती है । बिहार सरकार सभी हिन्दू देवी देवता का सम्मान करती है अतः बिहारी सोनार समाज प्रदेश सरकार से यह मांग क्यों नहीं करे की बिहार सरकार, इस दिन को संत नरहरि दास महाराज सोनार जयंती घोषित करे । बिहारी सोनार समाज प्रदेश सरकार से यह मांग क्यों नहीं करे की बिहार की राजधानी पटना के किसी प्रमुख चौक चौराहे को संत नरहरि दास महाराज चौक घोषित किया जाए एवं उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए । अगर राज्य सरकार आर्थिक तौर पर प्रतिमा स्थापित करने में असमर्थ है तो वह बिहार के सोनार समाज को यह अनुमति दे की बिहार का सोनार समाज अपने खर्चे पर सरकार द्वारा निर्धारित विशेष चौक चौराहा पर संत नरहरि दास महाराज सोनार की प्रतिमा स्थापित कर ले ।
समाधान:
बिहार सरकार द्वारा संत नरहरि दास महाराज सोनार जयंती की घोषणा
पटना के एक चौक चौराहा का नाम संत नरहरि दास महाराज सोनार चौराहा
उस विशेष चौक चौराहा का नाम संत नरहरि दास महाराज की प्रतिमा
निष्कर्ष
यदि सोनार समाज अपनी जनसंख्या, आर्थिक योगदान, पारंपरिक कौशल और मतदान शक्ति को संगठित रूप से प्रस्तुत करता है, तो वह न केवल अपनी समस्याओं का समाधान कर सकता है बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था में और अधिक सशक्त भूमिका निभा सकता है।
बिहार के सोनार के बीच एकता, जागरूकता और एक रणनीतिक दृष्टिकोण ही बिहार के सशक्त सोनार समाज के शसक्त भविष्य की कुंजी है ।
गर्व से कहो हम सोनार हैं !!
यह "चर्चा पत्र" एक प्रारंभिक मसौदा है, आप सभी से निवेदन है कि इसका अवलोकन कर सुधार हेतु अपने विचार अवश्य प्रदान करें।